pub-7443694812611045 ,,उदासीनता,,,,,? नियमित आहार न मिलने पर कुपोषण के शिकार हो रहे नन्हे बच्चे। - Agnichakra

,,उदासीनता,,,,,? नियमित आहार न मिलने पर कुपोषण के शिकार हो रहे नन्हे बच्चे।


स्वास्थ्य विभाग कुपोषण को लेकर गम्भीर

शिवपुरी। जिले में कुपोषण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से सक्रिय हैस्लम्प्स मेंं निवास कर रहे ग्रामीणों मेंं पल रहे बच्चे अधिकतर कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। दरसल बढ़ता प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इस बात का सूचक है कि भारत भूमंडलीकरण का इष्टतम लाभ ले रहा है, और मेक इन इंडिया
 जैसे अभियानों के माध्यम से देश को औद्योगिक उत्पादन का केंद्र बनाए जाने की दिशा में  निरंतर प्रगति हो रही है। लेकिन, इतना कुछ करने के बाद भी यदि कुछ समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो भारत विकास के पथ पर औंधे मुँह गिरेगा। इस समय हमारे सामने चुनौतियों का एक पहाड़ खड़ा है, और इन सब में एक बड़ी चुनौती बच्चों में कुपोषण की व्याप्ति दो तरह की है। एक, जन्म के साथ, और दूसरी, जन्म के कुछ समय बाद। इन दोनों ही स्थितियों में जच्चा-बच्चा को समुचित पोषण न दिया जाना ही कुपोषण का मुख्य कारण होता है। शिशु अवस्था में कुपोषण से ग्रस्त होने की स्थिति में बच्चा बड़े होने पर भी सुपोषित बच्चों की अपेक्षा शारीरिक-मानसिक स्तर पर काफी हीन रह जाता है। जो बच्चा जन्म से पाँच वर्ष के भीतर इसकी चपेट में आ जाता है, उसके लिये आगे इससे मुक्त होना काफी मुश्किल हो जाता है। स्पष्ट है कि एक बार कुपोषण से ग्रस्त होने की स्थिति में व्यक्ति का जीवन बेहद कठिन हो जाता है। कह सकते हैं कि कुपोषण एक धीमे ज़हर की तरह है, जो देश की भावी पीढ़ी को अंदर ही अंदर खोखला कर देता है।निस्संदेह कुपोषण के पीछे सबसे प्रमुख वजह पोषक आहार की कमी होती है, लेकिन इसके अलावा और भी कुछ कारण हैं जिन्हें कुपोषण के लिये जि़म्मेदार कहा जा सकता है। इनमें, समाज के एक बड़े हिस्से में जागरूकता की बेहद कमी और साफ-सफाई का अभाव प्रमुख हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ज़्यादातर लोग इस बात के प्रति लापरवाह नजऱ आते हैं कि उचित पोषण के लिये क्या और कितना खाना चाहिये? ऐसे लोगों की नजऱ में पोषण का सिर्फ एक अर्थ होता है कि जो भी मिले, खूब खाओ। वे समझते हैं कि खूब खाने से व्यक्ति तंदुरुस्त रहता है और प्राय: यही चीज़ वे अपने बच्चों पर भी लागू करते हैं। परिणामस्वरूप वे स्वयं तो कुपोषित और अस्वस्थ रहते ही हैं, अपनी आने वाली पीढिय़ों को भी कुपोषण पारंपरिक धरोहर केरूप में दे देते हैं। किसी भी राष्ट्र को विकसित बनाने का सपना तभी पूरा हो सकता है जब इसके नागरिक स्वस्थ हों। कहाभी गया है कि 'स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।' गौरतलब है कि आज के स्वस्थ और सुपोषित बच्चे ही कल को स्वस्थ नागरिक बनेंगे और इन्हीं स्वस्थ नागरिकों से बेहतर और क्रियाशील मानव संसाधन का निर्माण होता है, अत: यह नितांत ही आवश्यक है कि 'बच्चों  में कुपोषण की इस समस्या का समाधान किया जाए।

कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.