pub-7443694812611045 Mp के शिवपुरी जिले भर में,, शांति सदभाव के साथ ईदुल अजहा (बकरा ईद) का त्यौहार बड़े ही हर्ष उल्लाश के साथ मनाया गया,। - Agnichakra

Mp के शिवपुरी जिले भर में,, शांति सदभाव के साथ ईदुल अजहा (बकरा ईद) का त्यौहार बड़े ही हर्ष उल्लाश के साथ मनाया गया,।

 






बारिश से बिगड़ा नगर का मिजाज, मस्जिदों में अदा हुई शाही नमाज,।।



मोहम्मद फरहान काजी@ रन्नौद, -? शिवपुरी - जिले की नगर परिषद रन्नौद में आज ईदुल अजहा का त्योहार बड़े ही हर्ष उल्लाश से मनाया गया, बता दे कि आज सुबह से ही छोटे बड़ो बुजुर्गों में ईदुल अजहा के त्योहार की तैयारी के साथ चहल पहल शुरू हो गई थी , ईद की नमाज अदा करने से पहले तो तमाम घरों में बकरों को नहलाया गया उसके बाद हर नमाजी नाह धो कर खुश्बू लगा कर मस्जिदों में पहुचे जगह मस्जिदों में ईदुल अजहा बकरा ईद की नमाज अदा की गई उसके बाद एक दूसरे को गले मिल कर ईद की मुबारकबाद दी गई ,इसी क्रम में नमाज के बाद कुर्बानी का दिन भर सिलसिला जारी हुआ ,।।





जानकारी के अनुसार नगर रन्नौद में इस बार बारिश का मौषम देखते हुए ईदगाह व दरगाह पर होने वाली सामूहिक ईदुल अजहा की नमाज नगर की शाही जमा मस्जिद सदर बाजार,एवं रज़ा जमा मस्जिद बस स्टेण्ड पर अदा की,जिसके उपरांत अल्लाह के नेक मोमिन बंदों द्वारा पहले तो शांति के साथ नमाज अदा की उसके बाद इमाम साहब के द्वारा पढ़ाये गए ख़ुत्बे को बड़े ही गोर से सुना गया उसके बाद देश मे अमन चैन शांति के लिए दुआ ए खास की गई, एकाएक नमाज़ के बाद गले मिल कर मुबारकबाद दी गई,फिर कुर्बानी का दौर जारी हुआ ,शाम ढलते ही एक से बढ़ कर एक पकवान तैयार हुए और दावतों का दौर जारी रहा,।।





ईदुल अजहा की शाही नमाज़ के बाद शाही जमा मस्जिद के पेश इमाम शहर काजी साहब के पुत्र हाफिज फैजान काजी ने ईदुल अजहा बकरा ईद के बारे में बयान फरमाया बताया गया कि ईदुल अजहा को बकरीद के रूप में जाना जाता है।यह मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह हज यात्रा के अंत का प्रतीक है जो पवित्र शहर मक्का में दुनिया भर के हजारों लाखो मुसलमानों द्वारा किया जाता है। नफरत फैलाने वालों के अथक प्रयासों से देश में हर गुजरते दिन के साथ सांप्रदायिक तनाव बढ़ता जा रहा है। ईदुल अजहा का त्योहार मुसलमानों के लिए यह सिखाने का एक सुनहरा अवसर है कि हर किसी की ईश्वर प्रदत्त मानवीय गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए। चाहे उसकी आस्था, जाति, जातीय मूल या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो।







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