शोपीस बनी पानी की टंकी, 6 साल से बूंद-बूंद के लिए इधर उधर भटक रहे ग्रामीण,।।
पॉइंट नम्बर 1 -।। करोड़ो रुपए की लागत से बनी पानी टंकी शोपीस, 6 साल से बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण
पॉइंट नम्बर 2 -।। ग्रामीण क्षेत्र में जनप्रतिनिधि वोट लेकर जनता के तरफ मुंह तक नहीं फेरते, उदाहरण सामने पेश है।।
पॉइंट नम्बर 3 - ।। ग्रामीण स्तर पर आम जनता का गुस्सा हर दिन सर चढ़के बोल रहा है,देखना यह होगा कि चुनाव के समय क्या स्थिति बनती है,।।
बॉक्स - ।। जनता की ओर से बड़ा सवाल , आखिर करोड़ो रुपया कब तक बर्बाद होता रहेगा, आम जन की समस्या दूर करने बनाई पानी की शुद्ध सप्लाई के लिए टंकी,अपने आप में बेपनाह आंसू बहा रही है, ।।
फरहान काजी @ रन्नौद। सरकार भले ही हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कोलारस विधानसभा की रन्नौद तहसील के माडा गणेशखेड़ा गांव में बिल्कुल अलग नजर आ रही है। यहां करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से बनी पानी की विशाल टंकी पिछले 6 वर्षों से शोपीस बनकर खड़ी है। टंकी बनी, पाइपलाइन के सपने दिखाए गए, लेकिन गांव के लोगों की प्यास आज तक नहीं बुझ सकी।।
भीषण गर्मी के बीच गांव के करीब 3 हजार लोग पानी के संकट से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को हर दिन दूर-दूर से पानी ढोना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सिर पर मटके रखकर जोखिम भरे रास्तों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवार तो पीने के पानी के लिए पैसे खर्च कर पानी खरीद रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय नेताओं ने गांव में पानी पहुंचाने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की सुध लेने कोई नहीं आया। न जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न ही अधिकारियों ने। करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी अब गांव वालों के लिए उम्मीद नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही की निशानी बन चुकी है।।
गांव के लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं के दरवाजे खटखटाए जाते हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं। समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पानी व्यवस्था शुरू कर गांव को राहत दिलाई जाए

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