pub-7443694812611045 रन्नौद में ईदुल अजहा का पर्व हर्षौल्लास से मनाया, नमाज अदा कर मांगी हिंदू मुस्लिम एकता की दुआ।। - Agnichakra

रन्नौद में ईदुल अजहा का पर्व हर्षौल्लास से मनाया, नमाज अदा कर मांगी हिंदू मुस्लिम एकता की दुआ।।




पॉइंट नम्बर 1 -।। शांति सद्भाव के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग, ईदगाह पहुंचे जहां नमाज अदा की गई,।।



पॉइंट नम्बर 2 -।। शांति का परिचय देते हुए नमाज अदा कर वापस घर पहुंचे मुस्लिम समुदाय के लोग,।।





फरहान काजी रन्नौद ।। नगर रन्नौद में स्थित ईदगाह पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईदगाह पहुंच कर ईदुल अजहा का पर्व हर्षौल्लास से मनाया गया , बता दे कि सर्व प्रथम मुस्लिम समुदाय के लोग रन्नौद के वार्ड क्रमांक 11 व वार्ड क्रमांक 4 में ईदगाह एवं हज़रत हाजी वली साहब के पवित्र स्थान पर नए नए कपड़े पहन कर खुशबू लगा कर ईदुल अजहा की नमाज अदा करने पहुंचे।।



बता दे कि जहां शहर काजी , काजी मोहम्मद जाकिर साहब ने ईदुल अजहा की नमाज अदा करने आए मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज कैसे पढ़े उसके बारे में लोगों को समझाइश दी, जिसके बाद नमजियों को नमाज की नीयत कराई,जिसके उपरांत शहर काजी साहब के पुत्र हाफिज फैजान साहब ने दो रकात नमाज वाजिब अदा कराई तथा नमाज के बाद शहर काजी साहब के पुत्र हाफिज फैजान साहब ने ईदुल अजहा का ख़ुत्बा पढ़ाया जिसके बाद सैकड़ों हाथ उठे दुआ के लिए देश विदेश में अमन चैन शांति के लिए दुआ की गई, हिन्दू मुस्लिम भाईयों में मजबूत एकता कायम रहे इसके लिए खुशुशी दुआ की गई,।।।।



जानकारी के अनुसार , ईदुल अजहा का चांद नजर आने के बाद रन्नौद नगर में स्थिति ईदगाह व हजरत हाजी वली साहब के पवित्र स्थान पर गुरुवार अल सुबह से ईदुल अजहा का पर्व हर्षौल्लास से मनाया गया , यहां बताना अतिशयोक्ति होगा कि ईदुल अजहा बकरा ईद का पर्व हजरत इब्राइम अलैहिस्सलाम के बेटे हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम की याद में मनाया जाता है, यह भी बता दे कि बकरा ईद (ईद-उल-अजहा) मुख्य रूप से अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास, त्याग और समर्पण की भावना के रूप में मनाई जाती है ।।



यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम द्वारा अपने पुत्र की दी गई सर्वोच्च कुर्बानी (बलिदान) की याद में मनाया जाता इसी महान घटना की याद में दुनिया भर के मुस्लिम लोग इस दिन बकरा या अन्य वैध ओर हलाल जानवरों की कुर्बानी बलिदान देते हैं, बता दे कि ईदुल अजहा का त्योहार का मुख्य संदेश यह कि इंसान की असली कुर्बानी उसकी सच्ची नीयत ओर अल्लाह रब्बुल इज्जत के प्रति आज्ञाकारिता है क्योंकि मांस या खून से ज़्यादा व्यक्ति का समर्पण मनाए रखता है।।




अल्लाह की परीक्षा: इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के अपने प्रति प्रेम और निष्ठा की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी मांगी।



पुत्र का बलिदान: हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को अपने बेटे हजरत इस्माइल से बहुत अधिक लगाव था, लेकिन अल्लाह के हुक्म को सर्वोपरि मानते हुए उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया।।



कुर्बानी का चमत्कार: जब हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अपनी आँखों पर पट्टी बाँधकर अपने बेटे पर छुरी चलाने लगे, तब अल्लाह ने उनकी सच्ची निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर फरिश्ते (जिब्राइल अलैहिस्सलाम के ज़रिए उनके बेटे की जगह एक 'दुम्बा' (भेड़ जैसा जानवर) रख दिया इस तरह उनके पुत्र को जीवनदान मिला ओर वही से कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ जो त कयामत तक जारी रहेगा ऐसा मुस्लिम धर्म गुरु बताते हैं।।



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